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युवा बनाम भारतीय संस्कृति

एक समय था जब हमारे युवाओं के आदर्श, सिद्धांत, विचार, चिंतन और व्यवहार सब कुछ भारतीय संस्कृति के रंग में…

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मेरी मौत खुशी का वायस होगी —-[मिथिलेश]

जिन्दगी जिन्दादिली को जान ए रोशन यहॉं वरना कितने मरते हैं और पैदा होते जाते हैं। क्रान्तिकारी रोशन सिंह का…

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क्रांतिवीर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ——-मिथिलेश

यूँ तो नेताजी कब इस दुनिया को छोड़ गये यह आज भी रहस्य बना हुआ है लेकिन ऐसा मना जाता…

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वैज्ञानिक एवं सर्वश्रेष्ठ है नागरी लिपि- जस्टिस जोइस

नई दिल्ली। ‘नागरी लिपि पूर्णतयः वैज्ञानिक एवं विश्व की सर्वश्रेष्ठ लिपि है। भारत की सभी भाषाओं की एक अतिरिक्त लिपि…

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पर्दा प्रथा: विडंबना या कुछ और———मिथिलेश दुबे

अपने देश में महिलाओं को (खासकर उत्तर भारत में ज्यादा) पर्दे में रखने का रिवाज है । इसके पीछे का…

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चवन्नी का अवसान : चवनिया मुस्कान——–श्यामल सुमन

सच तो ये है कि चवन्नी से परिचय बहुत पहले हुआ और“चवनिया मुस्कान” से बहुत बाद में। आज जब याद…

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सरकार भी संसद से ऊपर नहीं – शम्भु चौधरी

भारत जब से आज़ाद हुआ इसके आज़ादी के मायने ही बदल गये। सांप्रदायिकता के नये-नये अर्थ शब्द कोश में भरने…

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बच्चे की मदर—– मिथिलेश

कई दिनों से घर जाने की तैयारी चल रही थी और अब तो होली बस दो ही दिन दूर था।…

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नारीका सनातन मातृत्व ही उसका स्वरुप है———मिथिलेश

वर्तमान युगमें सब ओर स्वतन्त्रता जाग्रत हो गयी है । नारी ह्रदयमें भी इसका होना स्वाभावीक है । इसमे सन्देह…