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दिल को बहलाना सीख लिया {ग़ज़ल} सन्तोष कुमार “प्यासा”

जबसे तेरी यादों में दिल को बहलाना सीख लियाहमने मुहब्बत में खोकर भी पाना सीख लियाजब धड़कन-२ भीगी गम से,…

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दिल अब दिल नहीं (ग़ज़ल) सन्तोष कुमार “प्यासा”

मेरा दिल अब दिल नहीं, एक वीरान सी बस्ती हैरूठ गई खुशियाँ, बेबसी मुझपर हंसती है क्या था मेरा क्या…

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[अंदाज़]………………………. नज़्म

इश्क करने वाले जानते हैं , मजबूरी क्या चीज़ है ?अपनों का दिल तोडना तो यारो बहुत आसान है ।…

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नासमझ समझता है {कविता} सूबे सिहं सुजान

नासमझ कुछ समझता है कभी-कभीबादल क्यूँ बरसता है कहीं-कहींचाँद क्यूँ निकलता है कभी-कभीये बात मेरी समझ में तो आ जाएगीवो…

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लोग {गजल} सन्तोष कुमार “प्यासा”

आखिर किस सभ्यता का बीज बो रहे हैं लोगअपनी ही गलतियों पर आज रो रहे हैं लोगहर तरफ फैली है…

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गज़ल ……………………..सुजन जी

चेहरे से साफ झलकता है इरादा क्या है सच छुपाने के लिये देखिये कहता क्या है जैसे इन्सान में अहसास…

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मोहब्बत………….रमन कुमार अग्रवाल’रम्मन’

परिंदा क़ैद में हैआशियाना देखता है परिंदा क़ैद में हैआशियाना देखता है वो बंद आँखों सेसपना सुहाना देखता है तू…

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मुस्कानों में जहर को देखा………….श्यामल सुमन

घर के ऊपर घर को देखाऔर भागते शहर को देखा किसे होश है एक दूजे कीमजलूमों पे कहर को देखा…

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आँख का पानी ………..डॉ कीर्तिवर्धन

होने लगा है कम अब आँख का पानी,छलकता नहीं है अब आँख का पानी|कम हो गया लिहाज,बुजुर्गों का जब से,मरने…