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भ्रष्टाचार

यहा हर तरफ है बिछा हुआ भ्रष्टाचार ! हर तरफ फैला है काला बाजार !! राजा करते है स्पेक्ट्रम घोटाला…

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जो ह्रदय स्पंदन हो मुखरित……………(सत्यम शिवम)

करना कैसा बहाना प्रिय, जो ह्रदय स्पंदन हो मुखरित। मिलन निशा का इक गीत अनोखा, जो कंठो से फूट पड़े,…

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युवा बनाम भारतीय संस्कृति

एक समय था जब हमारे युवाओं के आदर्श, सिद्धांत, विचार, चिंतन और व्यवहार सब कुछ भारतीय संस्कृति के रंग में…

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प्रकृति

रात की निर्जनता का सृजन कोई बतला दे !इस उदासता और कठोरता का मर्म कोई बतला दे !!सात समन्दर की…

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शकुन्तला

दुर्वाशा के वचनो का ना था उन्हे ज्ञान !वह सुन रही थी पक्षियो का सुरीला गान !!दुर्वाशा ने क्रोधित होकर…

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मेरा परिचय

पता नही क्यू मै अलग खङा हूं दुनिया से !अपने सपनो को ढूढता विमुख हुआ हूं दुनिया से !!पता नही…

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हम कैसे जिये

हम इस दुनिय मे कैसे जिये, रात जैसे अंधेरे मे हम कैसे चले !हम हिंदी निबंध आगे तो है साफ लेकिन,पिछे की…

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गर्मी (कविता) सन्तोष कुमार “प्यासा”

(विभिन्न रंगों से रंगी एक प्रस्तुति, हालिया समय का स्वरूप, गर्मी का भयावह रूप,) जालिम है लू जानलेवा है ये…

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एक चिट्ठी मिली ….. मेरे यार की —(लक्ष्मी नारायण लहरे )

बरसों की खबर -खबर बनकर रह गयी गलियों की चौड़ाई सिमट गयी उपाह-फोह की आवाज कमरे में दम तोड़ दी…